प्रिय अरविंदजी
आज समय मिला,आपकी किताब देखने का-हिंदी में समाचार।हर पंक्ति तो नहीं पढ़ी मैंने लेकिन हर अध्याय ग़ौर से देखा-पढ़ा।बहुत अच्छा काम है।भूमण्डलीकरण के दौर में हिंदी मीडिया और ख़ासकर नवभारत टाइम्स में आये परिवर्तनों का बहुत सटीक विश्लेषण है, जिसमें एक दृष्टि भी है और पूरी तैयारी भी।बहुत बधाई इस काम के लिए।यह पुस्तक मेरे लिए संग्रहणीय है।पता नहीं शुक्रवार के दौर में इससे नज़र कैसे चूक गई।काम का अतिरिक्त दबाव ही इसका कारण रहा होगा।
आपका
विष्णु नागर
(लेखक को लिखे पत्र में, Mar 14, 2017. संपादक एवँ चर्चित कवि)
आज समय मिला,आपकी किताब देखने का-हिंदी में समाचार।हर पंक्ति तो नहीं पढ़ी मैंने लेकिन हर अध्याय ग़ौर से देखा-पढ़ा।बहुत अच्छा काम है।भूमण्डलीकरण के दौर में हिंदी मीडिया और ख़ासकर नवभारत टाइम्स में आये परिवर्तनों का बहुत सटीक विश्लेषण है, जिसमें एक दृष्टि भी है और पूरी तैयारी भी।बहुत बधाई इस काम के लिए।यह पुस्तक मेरे लिए संग्रहणीय है।पता नहीं शुक्रवार के दौर में इससे नज़र कैसे चूक गई।काम का अतिरिक्त दबाव ही इसका कारण रहा होगा।
आपका
विष्णु नागर
(लेखक को लिखे पत्र में, Mar 14, 2017. संपादक एवँ चर्चित कवि)
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