हिंदुस्तान ( 12.01.2014), धर्मेंद्र सुशांत
http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-392181.html
http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-392181.html
युवा पत्रकार-शोधार्थी अरविंद दास की यह पुस्तक वैश्वीकरण के दौर में उभरे नव पूंजीतंत्र की छाया में विकसित और परिवर्तित हुई हिंदी पत्रकारिता का गहन विवेचन करती है। जिस परिघटना को आज सूचना-संचार क्रांति कहा जाता है, उसके दौर में हिंदी समाचार जगत ने न केवल नई पहचान कायम की, बल्कि अपने व्यावसायिक हितों को भी नए सिरे से बढ़ने-व्यापक होने की दिशा में दूर तक पहुंचाया। इस सफलता के बरअक्स हिंदी मीडिया को दूसरी तरफ ‘पेड न्यूज’ जैसे लांछन का सामना भी करना पड़ा। मिश्रित अर्थव्यवस्था के दौर में जहां सियासी और समाजी महत्व की खबरों के बदले मनोरंजन के तत्व हावी होते चले गए, वहीं प्रमुख मीडिया के सरोकार भी स्पष्ट तौर पर बदल गए। दास की यह किताब मीडिया के बहुआयामी बदलाव को सोदाहरण सामने रखती है। पिछले दो दशक का मीडिया जगत इस विवेचना के दायरे में शामिल है।
हिंदी में समाचार, अरविंद दास, अंतिका प्रकाशन, गाजियाबाद-5, मूल्य: 390 रु.
No comments:
Post a Comment