Sunday, 30 June 2013

हिंदी पत्रकारिता में संवेदनशीलता का अभाव

"पहले के समाचार पत्रों में खबरों का विभाजन नहीं था. पत्रकारिता साहित्य से हमेशा जुड़ी रही.  इसमें लेखक की संवेदना और चेतना महत्वपूर्ण होती थी. " बीते 11  मई को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर  में जेएनयू के प्रो. वीर भारत तलवार ने ये बातें कहीं.  अरविंद दास की पुस्तक 'हिंदी में समाचार' के लोकार्पण के अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा, " इस पुस्तक में तमाम अंतर्विरोधो पर प्रकाश डाला गया है. इसमें एक ओर स्त्रियों के सशक्तिकरण के साथ-साथ उनके उत्पीड़न के अंतर्विरोध का विश्लेषण है."
लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए तलवार ने कहा कि खबरों के प्रकार पर भी आपत्ति जाहिर की है. मसलन पिछले दिनों बलात्कार की खबरें जिस भाषा में लिखी गई, पुस्तक में उस भाषा के मर्दवादी रवैए की ओर संकेत किया गया है.  इसके साथ-साथ आज हिंदी पत्रकारिता में महिलाओं की कमी के मुद्दे को भी उठाया गया है.
करन थापर और वीर भारत तलवार
अंतिका प्रकाशन से आई अरविंद दास की पुस्तक को उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के बदलाव की कहानी बताने वाली पुस्तक कहा है, जिसके जरिए सामाजिक परिवर्तन का इतिहास पता चलता है. कार्यक्रम में आईटीवी के अध्यक्ष करन थापर, जनसत्ता के संपादक ओम थानवी और एनडीटीवी के कार्यकारी संपादक रवीश कुमार भी मौजूद थे. करन थापर ने मीडिया के मौजूदा स्वरूप पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा, "आज मीडिया में टीआरपी हावी है. एक ही कार्यक्रमों या खबरों को बार-बार दिखाया जाता है. ऐसा लगता है जैसे देश-दुनिया में इसके अलावा कोई चर्चा का विषय है ही नहीं." थापर ने भाषा की गुणवत्ता में गिरावट आने की भी बात कही. उन्होंने अरविंद की पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें समाचार पत्रों का जिस प्रकार विश्लेषण किया गया है, उसी तरह आज इलेक्ट्रानिक मीडिया का भी विश्लेषण होना चाहिए.  कार्यक्रम में ओम थानवी ने कहा कि अरविंद ने अपनी पुस्तक के जरिए हिंदी पत्रकारिता के कलेवर को मापने की कोशिश की है. भूमंडलीकरण की छाया कैसे संपादकों पर पड़ती है, यह पुस्तक इसका समाजशास्त्रीय अध्ययन है. इसके साथ-साथ थानवी ने भाषा के हो रहे पतन और खबरों से विलुप्त हो रही संवेदना पर भी चिंता व्यक्त की. इस दौरान रवीश कुमार ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन मोहल्ल लाइव के अविनाश कर रहे थे.  

(प्रथम प्रवक्ता, 16-30 जून 2013, समाचार-विचार पाक्षिक)